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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 97 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 5

10.97.5

Mantra ID: 10.97.5

अ॒श्व॒त्थे वो॑ नि॒षद॑नं प॒र्णे वो॑ वस॒तिष्कृ॒ता । गो॒भाज॒ इत्किला॑सथ॒ यत्स॒नव॑थ॒ पूरु॑षम् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.97.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ओषधियो! तुम पीपल के वृक्ष पर रहती हो एवं पलाश वृक्ष पर तुम्हारा निवासस्थान है. जब तुम रोगी पुरुष पर कृपा करती हो, तब तुम गाय पाने की अधिकारिणी बनती हो. (५)

EN English Translation

O ladies! You live on the peepal tree and on the Palash tree is your abode. When you have mercy on a sick man, you become the right to get a cow. (5)

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