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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 29 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 29 • ऋचा / मन्त्र 3

2.29.3

Mantra ID: 2.29.3

किमू॒ नु वः॑ कृणवा॒माप॑रेण॒ किं सने॑न वसव॒ आप्ये॑न । यू॒यं नो॑ मित्रावरुणादिते च स्व॒स्तिमि॑न्द्रामरुतो दधात ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.29.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे देवो! हम आज या आने वाले दिनों में तुम्हारा कोन सा कार्य कर सकते हैं? अर्थात्‌ कोई नहीं. हम सनातन प्राप्तव्य कार्य द्वारा भी कुछ नहीं कर सकते. हे मित्र, वरुण, अदिति, इंद्र एवं मरुद्गण! हमारा कल्याण करो. (३)

EN English Translation

Oh, God! What kind of work can we do for you today or in the days to come? i.e. none. We can't do anything even through eternal achievable work. O friends, Varuna, Aditi, Indra and Marudgana! Do us well. (3)

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