Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
3.15.2
त्वं नो॑ अ॒स्या उ॒षसो॒ व्यु॑ष्टौ॒ त्वं सूर॒ उदि॑ते बोधि गो॒पाः । जन्मे॑व॒ नित्यं॒ तन॑यं जुषस्व॒ स्तोमं॑ मे अग्ने त॒न्वा॑ सुजात ॥ (२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 3.15.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अग्नि! तुम वर्तमान उषा के प्रकाशित एवं सूर्य के निकलने के बाद हमारी रक्षा के निमित्त जागो. हे स्वयंभू! तुम हमारी स्तुतियां उसी प्रकार स्वीकार करो, जैसे पिता पुत्र को स्वीकार करता है. (२)
EN English Translation
O agni! You wake up to protect us after the present Usha is illuminated and the sun comes out. Oh, O self-styler! Accept Our praises in the same way that the Father accepts the Son. (2)