Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
3.33.12
अता॑रिषुर्भर॒ता ग॒व्यवः॒ समभ॑क्त॒ विप्रः॑ सुम॒तिं न॒दीना॑म् । प्र पि॑न्वध्वमि॒षय॑न्तीः सु॒राधा॒ आ व॒क्षणाः॑ पृ॒णध्वं॑ या॒त शीभ॑म् ॥ (१२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 3.33.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
“गायों की अभिलाषा करने वाले भरतवंशी लोग पार पहुंच गए. मेधावी मैं तुम्हारी स्तुति करता हूं. अन्न उत्पन्न करती हुई एवं शोभन धन से युक्त तुम दोनों अन्य नदियों को पूर्ण करो एवं जल्दी बहो.” (१२)
EN English Translation
"The Bharatvanshi people who wished for cows reached across. Brilliant, I praise you. Complete the other rivers, both of you producing food and with rich wealth, and flow quickly." (12)