Popular:
ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 39 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 39 • ऋचा / मन्त्र 4

3.39.4

Mantra ID: 3.39.4

नकि॑रेषां निन्दि॒ता मर्त्ये॑षु॒ ये अ॒स्माकं॑ पि॒तरो॒ गोषु॑ यो॒धाः । इन्द्र॑ एषां दृंहि॒ता माहि॑नावा॒नुद्गो॒त्राणि॑ ससृजे दं॒सना॑वान् ॥ (४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 3.39.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! गायों के निमित्त युद्ध करने वाले हमारे पितरों का मनुष्यों में कोई भी निंदक नहीं है. महिमा एवं वृत्रहननादि कर्म वाले इंद्र ने उन अंगिरागोत्रीय ऋषियों को समृद्ध गाएं दी थीं. (४)

EN English Translation

O Indra! There is no blasphemy among the human beings of our fathers who fight for cows. Indra, who had glory and vrithrahananadi karma, had given rich songs to those Angiragotrian sages. (4)

卐 HinduText AI