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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 40 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 40 • ऋचा / मन्त्र 2

3.40.2

Mantra ID: 3.40.2

इन्द्र॑ क्रतु॒विदं॑ सु॒तं सोमं॑ हर्य पुरुष्टुत । पिबा वृ॑षस्व॒ तातृ॑पिम् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.40.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! इस बुद्धिवर्धक एवं निचोड़े गए सोम को पीने की अभिलाषा करो. हे बहुतों द्वारा स्तुति किए गए इंद्र! इस तृप्तिदायक सोम को पिओ. (२)

EN English Translation

O Indra! Desire to drink this witful and squeezed mon. O Indra praised by many! Drink this satiating mon. (2)

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