Popular:
ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 55 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 55 • ऋचा / मन्त्र 10

3.55.10

Mantra ID: 3.55.10

विष्णु॑र्गो॒पाः प॑र॒मं पा॑ति॒ पाथः॑ प्रि॒या धामा॑न्य॒मृता॒ दधा॑नः । अ॒ग्निष्टा विश्वा॒ भुव॑नानि वेद म॒हद्दे॒वाना॑मसुर॒त्वमेक॑म् ॥ (१०)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 3.55.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

व्याप्त, रक्षक, प्रिय एवं क्षयरहित तेज धारण करने वाले अग्नि परम स्थान की रक्षा करते हैं. अग्नि उन सब भुवनों को जानते हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (१०)

EN English Translation

The agnis that are pervaded, guarded, beloved and fast-wearing without decay protect the ultimate place. Fire knows all those bhuvanas. The principal force of the gods is the same. (10)

卐 HinduText AI