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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 62 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 62 • ऋचा / मन्त्र 11

3.62.11

Mantra ID: 3.62.11

दे॒वस्य॑ सवि॒तुर्व॒यं वा॑ज॒यन्तः॒ पुरं॑ध्या । भग॑स्य रा॒तिमी॑महे ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.62.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अन्न की अभिलाषा करते हुए हम लोग तेजस्वी सविता देव के धन का दान उनकी स्तुति द्वारा चाहते हैं. (११)

EN English Translation

While wishing for food, we want the gift of the wealth of the stunning Savita Dev by her praise. (11)

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