Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
4.44.5
आ नो॑ यातं दि॒वो अच्छा॑ पृथि॒व्या हि॑र॒ण्यये॑न सु॒वृता॒ रथे॑न । मा वा॑म॒न्ये नि य॑मन्देव॒यन्तः॒ सं यद्द॒दे नाभिः॑ पू॒र्व्या वा॑म् ॥ (५)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 4.44.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
तुम दोनों स्वर्णनिर्मित एवं भलीप्रकार घूमने वाले रथ द्वारा स्वर्ग से हमारे पास आते हो. तुम्हारी अभिलाषा करने वाले अन्य यजमान तुम्हें रोक न लें, इसीलिए हमने पहले तुम्हारी स्तुति कर ली है. (५)
EN English Translation
You both come to us from heaven by a golden and well-rotating chariot. Let not the other hosts who wish you stop you, that is why we have praised you first. (5)