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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 23 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 23 • ऋचा / मन्त्र 2

5.23.2

Mantra ID: 5.23.2

तम॑ग्ने पृतना॒षहं॑ र॒यिं स॑हस्व॒ आ भ॑र । त्वं हि स॒त्यो अद्भु॑तो दा॒ता वाज॑स्य॒ गोम॑तः ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.23.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे बलवान्‌ अग्नि! तुम सत्यस्वरूप एवं महान्‌ तथा गोयुक्त अन्न देने वाले हो. मुझे शत्रु सेनाओं को हराने वाला पुत्र दो. (२)

EN English Translation

O agni! You are the ones of truth and of the great and the rich food. Give me the son who defeats enemy armies. (2)

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