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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 24 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 24 • ऋचा / मन्त्र 4

5.24.4

Mantra ID: 5.24.4

तं त्वा॑ शोचिष्ठ दीदिवः सु॒म्नाय॑ नू॒नमी॑महे॒ सखि॑भ्यः ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.24.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अपने तेज से दीप्त अग्नि! हम तुमसे सुख एवं पुत्र की याचना करते हैं. (४)

EN English Translation

O agni filled with your glory! We ask you for happiness and a son. (4)

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