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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 46 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 46 • ऋचा / मन्त्र 7

5.46.7

Mantra ID: 5.46.7

दे॒वानां॒ पत्नी॑रुश॒तीर॑वन्तु नः॒ प्राव॑न्तु नस्तु॒जये॒ वाज॑सातये । याः पार्थि॑वासो॒ या अ॒पामपि॑ व्र॒ते ता नो॑ देवीः सुहवाः॒ शर्म॑ यच्छत ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.46.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवपत्नियां हमारी स्तुतियों की अभिलाषा करती हुई हमारी रक्षा करें. वे बलवान्‌ पुत्र एवं अन्न पाने के लिए हमारी रक्षा करें. हे देवियो! आप धरती पर रहो अथवा आकाश में, पर हमें सुख प्रदान करो. (७)

EN English Translation

May the wives of god protect us by longing for our praises. Let them protect us to get sons and food. Oh, ladies! Whether you live on earth or in the sky, but give us happiness. (7)

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