Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
6.25.4
शूरो॑ वा॒ शूरं॑ वनते॒ शरी॑रैस्तनू॒रुचा॒ तरु॑षि॒ यत्कृ॒ण्वैते॑ । तो॒के वा॒ गोषु॒ तन॑ये॒ यद॒प्सु वि क्रन्द॑सी उ॒र्वरा॑सु॒ ब्रवै॑ते ॥ (४)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 6.25.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! वीर तुम्हारा अनुग्रह पाकर अपनी शारीरिक शक्ति से विरोधी वीर को मार डालता है. शरीर से शोभा पाते हुए वे दोनों एक-दूसरे के विरोध में युद्ध करते हैं तथा पुत्र, पौत्र, गाय, जल एवं ऊपजाऊ भूमि के विषय में जोर-जोर से बातें करते हैं. (४)
EN English Translation
O Indra! Veer gets your grace and kills the opponent Veer with his physical strength. Adorning the body, they both fight against each other and talk loudly about the son, grandson, cow, water and the fertile land. (4)