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7.20.9
ए॒ष स्तोमो॑ अचिक्रद॒द्वृषा॑ त उ॒त स्ता॒मुर्म॑घवन्नक्रपिष्ट । रा॒यस्कामो॑ जरि॒तारं॑ त॒ आग॒न्त्वम॒ङ्ग श॑क्र॒ वस्व॒ आ श॑को नः ॥ (९)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.20.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे धनशाली इंद्र! यह टपकता हुआ सोमरस तुम्हारे लिए क्रंदन कर रहा है. स्तोता तुम्हारी स्तुतियां कर रहे हैं. हे शक्र! तुम्हारे स्तोताओं को धन की अभिलाषा हुई है. तुम उन्हें शीघ्र धन दो. (९)
EN English Translation
O rich Indra! This dripping somras is groaning for you. The stotas are praising you. Oh, Shakr! Your stoes have a desire for wealth. You give them quick money. (9)