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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 21 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 21 • ऋचा / मन्त्र 4

7.21.4

Mantra ID: 7.21.4

भी॒मो वि॑वे॒षायु॑धेभिरेषा॒मपां॑सि॒ विश्वा॒ नर्या॑णि वि॒द्वान् । इन्द्रः॒ पुरो॒ जर्हृ॑षाणो॒ वि दू॑धो॒द्वि वज्र॑हस्तो महि॒ना ज॑घान ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.21.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने मानवहितकारी एवं सब कामों को जानने वाले आयुधों द्वारा भयंकर बनकर असुरों को घेरा था एवं उनके नगरों को कंपित बनाया था. महान्‌ एवं हाथ में वज्र धारण करने वाले इंद्र ने असुरों को मारा था. (४)

EN English Translation

Indra had become fierce by the armaments who knew mankind and all the work, surrounded the asuras and made their cities tremble. Indra, the great and holding the thunderbolt in his hand, had killed the asuras. (4)

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