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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 23 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 23 • ऋचा / मन्त्र 4

7.23.4

Mantra ID: 7.23.4

आप॑श्चित्पिप्युः स्त॒र्यो॒३॒॑ न गावो॒ नक्ष॑न्नृ॒तं ज॑रि॒तार॑स्त इन्द्र । या॒हि वा॒युर्न नि॒युतो॑ नो॒ अच्छा॒ त्वं हि धी॒भिर्दय॑से॒ वि वाजा॑न् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.23.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! जिस प्रकार बिना ब्याई गाय मोटी होती है, उसी प्रकार तुम्हारी कृपा से जल बढ़े एवं तुम्हारे स्तोता जल को प्राप्त करें. वायु जिस प्रकार घोड़ों के पास जाती है, उसी प्रकार बुम हमारे पास आओ. तुम यज्ञकर्मो द्वारा अन्न देते हो. (४)

EN English Translation

O Indra! Just as a cow is fat without marriage, in the same way, by your grace, increase the water and get your stota water. Just as the wind goes to the horses, so come to us. You give food through sacrifice. (4)

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