Popular:
ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 26 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 26 • ऋचा / मन्त्र 1

7.26.1

Mantra ID: 7.26.1

न सोम॒ इन्द्र॒मसु॑तो ममाद॒ नाब्र॑ह्माणो म॒घवा॑नं सु॒तासः॑ । तस्मा॑ उ॒क्थं ज॑नये॒ यज्जुजो॑षन्नृ॒वन्नवी॑यः श‍ृ॒णव॒द्यथा॑ नः ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 7.26.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

धनस्वामी इंद्र के उद्देश्य से न निचोड़ा हुआ एवं स्तुतिहीन सोमरस उन्हें प्रसन्न नहीं करता. इंद्र की सेवा करने वाला मैं राजा के द्वारा भी आदरपूर्वक सुनने योग्य एवं नवीन मंत्रसमूह इंद्र के निमित्त पढ़ता हूं. (१)

EN English Translation

The unsquenched and praiseless somras for the purpose of The Lord Indra does not please him. I read the king who serves Indra also respectfully and a new group of mantras for Indra. (1)

卐 HinduText AI