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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 39 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 39 • ऋचा / मन्त्र 6

7.39.6

Mantra ID: 7.39.6

र॒रे ह॒व्यं म॒तिभि॑र्य॒ज्ञिया॑नां॒ नक्ष॒त्कामं॒ मर्त्या॑ना॒मसि॑न्वन् । धाता॑ र॒यिम॑विद॒स्यं स॑दा॒सां स॑क्षी॒महि॒ युज्ये॑भि॒र्नु दे॒वैः ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.39.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम यज्ञपात्र देवों के लिए अपनी स्तुतियों के साथ हव्य देते हैं. अग्नि हमारी कामनाओं का विरोध न करते हुए हमारे यज्ञ में फैलें. हे देवो! तुम उपेक्षा न करने एवं सदा उपभोग करने योग्य धन हमें दो. हम आज अपने सहायक देवों से मिलेंगे. (६)

EN English Translation

We offer our praises to the sacrificial gods. Let the agni spread in our yagna without resisting our desires. Oh, God! You do not neglect and give us money to be consumed forever. We will meet our assistant gods today. (6)

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