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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 91 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 91 • ऋचा / मन्त्र 4

7.91.4

Mantra ID: 7.91.4

याव॒त्तर॑स्त॒न्वो॒३॒॑ याव॒दोजो॒ याव॒न्नर॒श्चक्ष॑सा॒ दीध्या॑नाः । शुचिं॒ सोमं॑ शुचिपा पातम॒स्मे इन्द्र॑वायू॒ सद॑तं ब॒र्हिरेदम् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.91.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पवित्र सोमरस को पीने वाले इंद्र एवं वायु! जब तक तुम्हारे शरीर की गति है, जब तक बल है एवं जब तक ऋत्विज्‌ ज्ञानरूपी बल से दीप्तिशाली हैं, तब तक तुम हमारे पवित्र सोमरस को पिओ एवं इन कुशों पर बैठो. (४)

EN English Translation

O Indra and Air who drink the holy Somras! As long as your body is moving, as long as there is strength, and as long as the ritwijas are illuminated by the force of knowledge, then drink our holy somras and sit on these kushas. (4)

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