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8.13.22
क॒दा त॑ इन्द्र गिर्वणः स्तो॒ता भ॑वाति॒ शंत॑मः । क॒दा नो॒ गव्ये॒ अश्व्ये॒ वसौ॑ दधः ॥ (२२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 8.13.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे स्तुतियां स्वीकार करने वाले इंद्र! तुम्हारा स्तोता कब अतिशय सुखी होगा? तुम हमें कब गायों एवं अश्चों वाले घर में रखोगे. (२२)
EN English Translation
O Indra who accepts praises! When will your hymn be very happy? When will you keep us in a house with cows and ashes? (22)