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8.31.6
प्रति॑ प्राश॒व्या॑ँ इतः स॒म्यञ्चा॑ ब॒र्हिरा॑शाते । न ता वाजे॑षु वायतः ॥ (६)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 8.31.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
वे भोजन के योग्य अन्न देवों से प्राप्त करते हैं, मिलकर यज्ञ के कुशों पर बैठते हैं एवं किसी के पास अन्न मांगने नहीं जाते. (६)
EN English Translation
They get food from the gods, sit together on the kushas of yajna and do not go to anyone to ask for food. (6)