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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 35 • Mantra / Rik 19

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 35 • ऋचा / मन्त्र 19

8.35.19

Mantra ID: 8.35.19

अत्रे॑रिव श‍ृणुतं पू॒र्व्यस्तु॑तिं श्या॒वाश्व॑स्य सुन्व॒तो म॑दच्युता । स॒जोष॑सा उ॒षसा॒ सूर्ये॑ण॒ चाश्वि॑ना ति॒रोअ॑ह्न्यम् ॥ (१९)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.35.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शत्रुओं का गर्व नष्ट करने वाले अश्चिनीकुमारो! जिस प्रकार तुमने अत्रि मुनि की स्तुति सुनी, उसी प्रकार मुझ श्यावाश्व की भी सुनो. तुम उषा और सूर्य के साथ मिलकर प्रातःकाल सोमरस पिओ. (१९)

EN English Translation

O aschinikumaro who destroys the pride of the enemies! Just as you heard the praise of Atri Muni, so also listen to me. You drink somras in the morning together with Usha and Surya. (19)

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