Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 35 • Mantra / Rik 21

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 35 • ऋचा / मन्त्र 21

8.35.21

Mantra ID: 8.35.21

र॒श्मीँरि॑व यच्छतमध्व॒राँ उप॑ श्या॒वाश्व॑स्य सुन्व॒तो म॑दच्युता । स॒जोष॑सा उ॒षसा॒ सूर्ये॑ण॒ चाश्वि॑ना ति॒रोअ॑ह्न्यम् ॥ (२१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.35.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शत्रुओं का गर्व नष्ट करने वाले अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार घोड़ा लगाम के सहारे चलता है, उसी प्रकार मुझ सोमरस निचोड़ने वाले श्यावाश्व की स्तुति सुनकर तुम चले आओ. तुम सूर्य एवं उषा के साथ मिलकर प्रातःकाल सोमरस पिओ. (२१)

EN English Translation

O Ashwinikumaro who destroys the pride of enemies! Just as the horse moves with the reins, so hear the praise of the shywash that squeezes me to somers, and come away. You drink somras in the morning together with Surya and Usha. (21)

卐 HinduText AI