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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 35 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 35 • ऋचा / मन्त्र 5

8.35.5

Mantra ID: 8.35.5

स्तोमं॑ जुषेथां युव॒शेव॑ क॒न्यनां॒ विश्वे॒ह दे॑वौ॒ सव॒नाव॑ गच्छतम् । स॒जोष॑सा उ॒षसा॒ सूर्ये॑ण॒ चेषं॑ नो वोळ्हमश्विना ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.35.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे देव अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार युवक कन्याओं की पुकार पर ध्यान देते हैं, उसी प्रकार तुम हमारे यज्ञ में स्तोत्रों को स्वीकार करो. तुम इस यज्ञ के तीनों सवनों में आओ एवं उषा व सूर्य के साथ मिलकर हमारा अन्न स्वीकार करो. (५)

EN English Translation

Oh God Ashwinikumaro! Just as young men pay attention to the call of the daughters, so also accept the hymns in our yajna. You come to the three saans of this yajna and together with Usha and Surya, accept our food. (5)

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