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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 35 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 35 • ऋचा / मन्त्र 7

8.35.7

Mantra ID: 8.35.7

हा॒रि॒द्र॒वेव॑ पतथो॒ वनेदुप॒ सोमं॑ सु॒तं म॑हि॒षेवाव॑ गच्छथः । स॒जोष॑सा उ॒षसा॒ सूर्ये॑ण च॒ त्रिर्व॒र्तिर्या॑तमश्विना ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.35.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! हारिद्रव पक्षी जिस प्रकार जल पर गिरते हैं, उसी प्रकार तुम सोमरस पर गिरो. भैंसा जिस प्रकार जल की ओर आता है, उसी प्रकार तुम सोमरस की ओर आओ. तुम उषा एवं सूर्य के साथ मिलकर तीनों सवनों में आओ. (७)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! Just as Haridrava birds fall on water, so you fall on somers. Just as the buffalo comes towards the water, so you come to the somras. You come together with Usha and Surya in all the three sawans. (7)

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