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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 36 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 36 • ऋचा / मन्त्र 7

8.36.7

Mantra ID: 8.36.7

श्या॒वाश्व॑स्य सुन्व॒तस्तथा॑ श‍ृणु॒ यथाश‍ृ॑णो॒रत्रेः॒ कर्मा॑णि कृण्व॒तः । प्र त्र॒सद॑स्युमाविथ॒ त्वमेक॒ इन्नृ॒षाह्य॒ इन्द्र॒ ब्रह्मा॑णि व॒र्धय॑न् ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.36.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुमने जिस प्रकार अत्रि की स्तुतियां सुनी थीं, उसी प्रकार सोमरस निचोड़ने वाले तथा यज्ञकर्म करने वाले मुझ श्यावाश्व ऋषि की स्तुतियों को भी सुनो. हे इंद्र! तुमने अकेले ही स्तुतियों को बढ़ाते हुए युद्ध में त्रसदस्यु की रक्षा की थी. (७)

EN English Translation

O Indra! Just as you heard the praises of Atri, listen to the praises of my sage Sheyavasva, who squeezes and performs yajna karma. O Indra! You alone protected the member of the war by raising praises. (7)

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