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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 39 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 39 • ऋचा / मन्त्र 10

8.39.10

Mantra ID: 8.39.10

त्वं नो॑ अग्न आ॒युषु॒ त्वं दे॒वेषु॑ पूर्व्य॒ वस्व॒ एक॑ इरज्यसि । त्वामापः॑ परि॒स्रुतः॒ परि॑ यन्ति॒ स्वसे॑तवो॒ नभ॑न्तामन्य॒के स॑मे ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.39.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम अकेले होते हुए भी मानो देवों के स्वामी हो. हे सेतुरूप अग्नि! तुम्हारे चारों तरफ जल रहता है. तुम सभी शत्रुओं को मारो. (१०)

EN English Translation

O agni! Even if you are alone, it is as if you are the lord of the gods. O agni as a bridge! There is water all around you. You kill all enemies. (10)

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