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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 39 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 39 • ऋचा / मन्त्र 5

8.39.5

Mantra ID: 8.39.5

स चि॑केत॒ सही॑यसा॒ग्निश्चि॒त्रेण॒ कर्म॑णा । स होता॒ शश्व॑तीनां॒ दक्षि॑णाभिर॒भीवृ॑त इ॒नोति॑ च प्रती॒व्यं१॒॑ नभ॑न्तामन्य॒के स॑मे ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.39.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्नि शत्रुपराजय संबंधी विविध कमों द्वारा जाने जाते हैं एवं सभी देवों के होता हैं. पशुओं से घिरे हुए एवं शत्रुओं के विरोध में जाने वाले अग्नि सभी शत्रुओं का नाश करें. (५)

EN English Translation

The agni enemies are known by various functionaries related to the kingdom and belong to all the gods. May the agni surrounded by animals and go against the enemies destroy all the enemies. (5)

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