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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 41 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 41 • ऋचा / मन्त्र 7

8.41.7

Mantra ID: 8.41.7

य आ॒स्वत्क॑ आ॒शये॒ विश्वा॑ जा॒तान्ये॑षाम् । परि॒ धामा॑नि॒ मर्मृ॑श॒द्वरु॑णस्य पु॒रो गये॒ विश्वे॑ दे॒वा अनु॑ व्र॒तं नभ॑न्तामन्य॒के स॑मे ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.41.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सारी दिशाओं को व्याप्त करने वाले वरुण चारों ओर फैले हुए शन्रुनगरों को नष्ट करते हैं. सब देवता वरुण के रथ के आगे यज्ञकर्मो का अनुष्ठान करते हैं. वरुण सब शत्रुओं को मारें. (७)

EN English Translation

Varuna, who covers all directions, destroys the shanrunagars spread all around. All the deities perform the ritual of yajnakarmo in front of varuna's chariot. Varuna kills all the enemies. (7)

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