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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 44 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 44 • ऋचा / मन्त्र 15

8.44.15

Mantra ID: 8.44.15

यो अ॒ग्निं त॒न्वो॒३॒॑ दमे॑ दे॒वं मर्तः॑ सप॒र्यति॑ । तस्मा॒ इद्दी॑दय॒द्वसु॑ ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.44.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो मनुष्य धनप्राप्ति के लिए अपने घर में अग्नि की सेवा करता है, अग्नि उसीको धन देते हैं. (१५)

EN English Translation

The man who serves agni in his house for the sake of wealth, the agni gives him wealth. (15)

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