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8.44.17
उद॑ग्ने॒ शुच॑य॒स्तव॑ शु॒क्रा भ्राज॑न्त ईरते । तव॒ ज्योतीं॑ष्य॒र्चयः॑ ॥ (१७)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.44.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अग्नि! तुम्हारी निर्मल, शुक्लवर्ण और दीप्ति वाली किरणें तुम्हारे तेज को प्रेरित करती हैं. (१७)
EN English Translation
O agni! Your pure, shuklavarna and bright rays inspire your brightness. (17)