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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 44 • Mantra / Rik 30

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 44 • ऋचा / मन्त्र 30

8.44.30

Mantra ID: 8.44.30

पु॒राग्ने॑ दुरि॒तेभ्यः॑ पु॒रा मृ॒ध्रेभ्यः॑ कवे । प्र ण॒ आयु॑र्वसो तिर ॥ (३०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.44.30 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कवि एवं वासदाता अग्नि! हमें पापियों एवं हिंसकों के सामने से बचाकर हमारी उमर बढ़ाओ. (३०)

EN English Translation

O poet and the worshiper of agni! Increase our age by protecting us from sinners and violents. (30)

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