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8.50.17
अ॒द्याद्या॒ श्वःश्व॒ इन्द्र॒ त्रास्व॑ प॒रे च॑ नः । विश्वा॑ च नो जरि॒तॄन्स॑त्पते॒ अहा॒ दिवा॒ नक्तं॑ च रक्षिषः ॥ (१७)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.50.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! आज, कल एवं परसों हमारी रक्षा करना. हे साधुपालक इंद्र! हम स्तोताओं की रक्षा रात एवं दिन सब समय करना. (१७)
EN English Translation
O Indra! Protect us today, tomorrow and the day after. O Lord Indra! We protect the psalmists all the time of night and day. (17)