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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 50 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 50 • ऋचा / मन्त्र 3

8.50.3

Mantra ID: 8.50.3

आ वृ॑षस्व पुरूवसो सु॒तस्ये॒न्द्रान्ध॑सः । वि॒द्मा हि त्वा॑ हरिवः पृ॒त्सु सा॑स॒हिमधृ॑ष्टं चिद्दधृ॒ष्वणि॑म् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.50.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अधिक धनी इंद्र! तुम निचोड़े हुए सोमरस से अपने उदर को सींचो. हे हरि नामक अश्चों के स्वामी इंद्र! हम इन्हें संग्राम में शत्रु को हराने वाला, दूसरों द्वारा पराजित न होने वाला एवं दूसरों को दबाने वाला जानते हैं. (३)

EN English Translation

O richer Indra! You water your abdomen from the squeezed somerus. O Lord Indra of tears named Hari! We know them to be the one who defeated the enemy in the struggle, not to be defeated by others and to suppress others. (3)

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