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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 52 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 52 • ऋचा / मन्त्र 9

8.52.9

Mantra ID: 8.52.9

अ॒स्य वृष्णो॒ व्योद॑न उ॒रु क्र॑मिष्ट जी॒वसे॑ । यवं॒ न प॒श्व आ द॑दे ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.52.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वर्षाकारक इंद्र द्वारा विविध अन्न पाकर लोग जीवन के लिए तरह-तरह के काम करते हैं एवं शत्रुओं के समान जौ खाते हैं. (९)

EN English Translation

Having got various grains through the rainfeder Indra, people do various things for life and eat barley like enemies. (9)

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