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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 54 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 54 • ऋचा / मन्त्र 3

8.54.3

Mantra ID: 8.54.3

आ त्वा॑ गी॒र्भिर्म॒हामु॒रुं हु॒वे गामि॑व॒ भोज॑से । इन्द्र॒ सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.54.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे महान्‌ एवं विशाल इंद्र! मैं तुम्हें सोमरस पीने के लिए उसी प्रकार बुलाता हूं, जिस प्रकार गाय को घास खाने के लिए बुलाया जाता है. (३)

EN English Translation

O great and great Indra! I call you to drink somras in the same way that the cow is called to eat grass. (3)

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