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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 57 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 57 • ऋचा / मन्त्र 10

8.57.10

Mantra ID: 8.57.10

तं त्वा॑ य॒ज्ञेभि॑रीमहे॒ तं गी॒र्भिर्गि॑र्वणस्तम । इन्द्र॒ यथा॑ चि॒दावि॑थ॒ वाजे॑षु पुरु॒माय्य॑म् ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.57.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तुतियों द्वारा अत्यधिक प्रसिद्ध इंद्र! मुझ अधिक बुद्धि वाले को तुम जिस प्रकार की स्तुतियों और यज्ञों के कारण बचा सको, मैं उसी प्रकार की स्तुतियों और यज्ञों द्वारा तुमसे याचना करता हूं. (१०)

EN English Translation

O Indra highly famous by the praises! I beseech you through the same kind of praises and sacrifices that you can save to me with more wisdom. (10)

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