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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 57 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 57 • ऋचा / मन्त्र 2

8.57.2

Mantra ID: 8.57.2

तुवि॑शुष्म॒ तुवि॑क्रतो॒ शची॑वो॒ विश्व॑या मते । आ प॑प्राथ महित्व॒ना ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.57.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अधिक शक्तिशाली, अनेक कर्म करने वाले, अधिक बुद्धिमान्‌ एवं पूजनीय इंद्र! तुमने विश्वव्यापक महत्त्व द्वारा संसार को व्याप्त किया है. (२)

EN English Translation

O more powerful, many doers, more intelligent and revered Indra! You have pervaded the world by worldwide importance. (2)

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