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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 58 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 58 • ऋचा / मन्त्र 14

8.58.14

Mantra ID: 8.58.14

अतीदु॑ श॒क्र ओ॑हत॒ इन्द्रो॒ विश्वा॒ अति॒ द्विषः॑ । भि॒नत्क॒नीन॑ ओद॒नं प॒च्यमा॑नं प॒रो गि॒रा ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.58.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

शक्र (इंद्र) युद्ध में सभी शत्रुओं का अतिक्रमण करके चलते हैं. वे सभी द्वेषियों को छोड़ देते हैं. सुंदर एवं मेघों के ऊपर वर्तमान इंद्र गर्जन एवं वज्र के शब्द से ताड़ित करके मेघों का भेदन करते हैं. (१४)

EN English Translation

Shakra (Indra) transgresses all the enemies in the war. They leave out all malice. On the beautiful and clouds, the present Indra roars and penetrates the clouds by chastising with the word of thunderbolt. (14)

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