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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 58 • Mantra / Rik 16

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 58 • ऋचा / मन्त्र 16

8.58.16

Mantra ID: 8.58.16

आ तू सु॑शिप्र दम्पते॒ रथं॑ तिष्ठा हिर॒ण्यय॑म् । अध॑ द्यु॒क्षं स॑चेवहि स॒हस्र॑पादमरु॒षं स्व॑स्ति॒गाम॑ने॒हस॑म् ॥ (१६)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.58.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शोभन-नासिका वाले एवं गृहस्वामी इंद्र! तुम रथरूपी घर में बैठो. वह रथ सोने का बना हुआ है, दीप्त, अनेक पहियों वाला, कुशलतापूर्वक चलने वाला एवं पापरहित है. हम दोनों उस रथ में मिलें. (१६)

EN English Translation

O Shobhan-Nassawale and the homeowner Indra! You sit in the chariot house. The chariot is made of gold, bright, multi-wheeled, efficient and sinless. We both meet in that chariot. (16)

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