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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 58 • Mantra / Rik 18

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 58 • ऋचा / मन्त्र 18

8.58.18

Mantra ID: 8.58.18

अनु॑ प्र॒त्नस्यौक॑सः प्रि॒यमे॑धास एषाम् । पूर्वा॒मनु॒ प्रय॑तिं वृ॒क्तब॑र्हिषो हि॒तप्र॑यस आशत ॥ (१८)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.58.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्रियमेध ऋषि के परिवार वाले लोगों ने देवों के पुराने स्थान अर्थात्‌ स्वर्ग को प्राप्त किया है, मुख्य दान के लक्ष्य से कुशों का विस्तार किया है तथा सोमरस आदि प्राप्त किया है. (१८)

EN English Translation

The family members of Priyamedha Rishi have attained the old place of the gods i.e. heaven, expanded the Kushas with the aim of the main donation and attained somras etc. (18)

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