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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 61 • Mantra / Rik 17

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 17

8.61.17

Mantra ID: 8.61.17

सोम॑स्य मित्रावरु॒णोदि॑ता॒ सूर॒ आ द॑दे । तदातु॑रस्य भेष॒जम् ॥ (१७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.61.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मित्र व वरुण! निकल आने पर सूर्य सोमरस ग्रहण करते हैं. वह ग्रहण हम बीमारों की दवा है. (१७)

EN English Translation

Oh my friend and Varun! When it comes out, the sun eclipses the somras. He assumes we have the medicine of the sick. (17)

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