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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 61 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 4

8.61.4

Mantra ID: 8.61.4

जा॒म्य॑तीतपे॒ धनु॑र्वयो॒धा अ॑रुह॒द्वन॑म् । दृ॒षदं॑ जि॒ह्वयाव॑धीत् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.61.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अन्य देने वाले अग्नि सबसे ऊपर वर्तमान अंतरिक्ष को भी अतिक्रमण कर जाते हैं. अपनी ज्वाला से मेघ का वध करने वाले अग्नि जल को मुक्त करने के लिए ऊपर चढ़ते हैं. (४)

EN English Translation

Other giving agnis also encroach upon the current space at the top. Those who kill the cloud from their flame climb up to free the agni water. (4)

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