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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 63 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 63 • ऋचा / मन्त्र 11

8.63.11

Mantra ID: 8.63.11

यं त्वा॑ गो॒पव॑नो गि॒रा चनि॑ष्ठदग्ने अङ्गिरः । स पा॑वक श्रुधी॒ हव॑म् ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.63.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सर्वत्र गमनशील एवं पवित्रकर्ता अग्नि! गोपवन ऋषि ने तुम्हें अतिशय अन्नदाता बनाया था. तुम उनकी पुकार सुनो. (११)

EN English Translation

O agni, the holy and holy one everywhere! Sage Gopavan made you a great annadata. You hear their call. (11)

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