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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 65 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 65 • ऋचा / मन्त्र 2

8.65.2

Mantra ID: 8.65.2

अ॒यमिन्द्रो॑ म॒रुत्स॑खा॒ वि वृ॒त्रस्या॑भिन॒च्छिरः॑ । वज्रे॑ण श॒तप॑र्वणा ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.65.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने मरुतों के साथ मिलकर सौ पर्वो वाले वज्र द्वारा वृत्र का सिर काटा. (२)

EN English Translation

Indra, along with the Maruts, cut off the head of the vritra with a thunderbolt of a hundred parvas. (2)

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