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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 65 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 65 • ऋचा / मन्त्र 6

8.65.6

Mantra ID: 8.65.6

इन्द्रं॑ प्र॒त्नेन॒ मन्म॑ना म॒रुत्व॑न्तं हवामहे । अ॒स्य सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.65.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम इस सोम को पीने के लिए मरुतों सहित इंद्र को प्राचीन स्तोत्रों द्वारा बुलाते हैं. (६)

EN English Translation

We call Indra by ancient hymns including the maruts to drink this soma. (6)

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