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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 66 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 66 • ऋचा / मन्त्र 3

8.66.3

Mantra ID: 8.66.3

समित्तान्वृ॑त्र॒हाखि॑द॒त्खे अ॒राँ इ॑व॒ खेद॑या । प्रवृ॑द्धो दस्यु॒हाभ॑वत् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.66.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वृत्रनाशक इंद्र ने उन्हें एक साथ इस प्रकार खींचा जिस प्रकार रस्सी से चक्र के अरे खींचे जाते हैं. इंद्र दस्युजनों को मारकर बढ़े. (३)

EN English Translation

The vrittle Indra pulled them together in such a way as the rope pulls the wheels of the chakra. Indra grew up killing the bandits. (3)

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