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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 67 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 67 • ऋचा / मन्त्र 10

8.67.10

Mantra ID: 8.67.10

तवेदि॑न्द्रा॒हमा॒शसा॒ हस्ते॒ दात्रं॑ च॒ना द॑दे । दि॒नस्य॑ वा मघव॒न्सम्भृ॑तस्य वा पू॒र्धि यव॑स्य का॒शिना॑ ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.67.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम्हारी आशा करके ही मैं हाथ में दरांत धारण करता हूं. तुम पहले दिन काटे और साफ किए जौ से मेरी मुट्ठी पूरी करो. (१०)

EN English Translation

O Indra! It is only by hoping for you that I hold a sickle in my hand. You cut the first day and complete my fist with cleaned barley. (10)

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