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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 67 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 67 • ऋचा / मन्त्र 4

8.67.4

Mantra ID: 8.67.4

नकीं॑ वृधी॒क इ॑न्द्र ते॒ न सु॒षा न सु॒दा उ॒त । नान्यस्त्वच्छू॑र वा॒घतः॑ ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.67.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शूर इंद्र! तुम्हारे अतिरिक्त कोई भी बढ़ाने वाला नहीं है. तुम्हारे अतिरिक्त कोई भी संग्राम में सहायता करने वाला एवं उत्तम दाता नहीं है. तुम्हारे अतिरिक्त यजमान का कोई इंद्र नहीं है. (४)

EN English Translation

O Shur Indra! None of your additions is going to increase. Apart from you, there is no one to help and give good in the struggle. There is no Indra of the host other than you. (4)

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