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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 71 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 71 • ऋचा / मन्त्र 1

8.71.1

Mantra ID: 8.71.1

आ प्र द्र॑व परा॒वतो॑ऽर्वा॒वत॑श्च वृत्रहन् । मध्वः॒ प्रति॒ प्रभ॑र्मणि ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.71.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वृत्रहंता इंद्र! यज्ञ में नशीले सोमरस के प्रति तुम दूर और पास के स्थानों से आओ. (१)

EN English Translation

O Vrithrahanta Indra! Towards the intoxicating somras in the yajna you come from far and near places. (1)

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